रिजर्व बैंक द्वारा जारी "रेपो रेट"में कमी से क्या फायदे होंगे आम आदमी को.?
आर्थिक नीति – रेपो रेट में भारी कमी (50%) से क्या फायदे होंगे आम आदमी को.?
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भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने शुक्रवार को अर्थव्यवस्था में वृद्धि को बढ़ावा देने के लिए रेपो रेट में 50 आधार अंकों की बड़ी कटौती करके इसे 6% से 5.5% करने की घोषणा की है। 1 साल में लगातार तीसरी बार रेपो रेट में कटौती की गई है। रिजर्व बैंक की इस कदम से प्लाटिंग रेट पर कर्ज लेने वालों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। इस फैसले से एक करोड रुपए की लोन पर हर महा ब्याज के रूप में 3283 रुपए और सालाना 39396 की बचत होगी। दोस्तों रिजर्व बैंक द्वारा लिया गया यह एक ऐतिहासिक निर्णय है और आर्थिक जगत मैं इसके बड़े परिणाम देखने को मिल सकते हैं। इसीलिए आर्थिक फंडा ब्लॉग, arthikfunda.com कि आज के आर्टिकल में रिजर्व बैंक के इस बड़े आर्थिक फैसले की पूरी विवेचना करेंगे। और सबसे बड़ी बात यह समझने का प्रयास करेंगे कि आखिर आरबीआई के इस बड़े आर्थिक फैसले का देश के विभिन्न सेक्टरों पर क्या असर पड़ेगा..? इस पूरे घटनाक्रम को समझने के लिए आज की पोस्टों को में कई भागों में विभाजित कर रहा हूं। ताकि यह आसानी से आपको समझ में आ सके। आज की इस आर्टिकल को हम निम्न बिंदुओं के तहत रीढ़ करेंगे —
आज के आर्टिकल में ( टेबल ऑफ़ कंटेंट )
- भूमिका।
- विकास दर 6.5% रहने का अनुमान।
- ब्याज दरों में डबल कटौती।
- सेंसेक्स में 747 अंक का उछाल।
- यह चार बातें आपकी जेब पर पूरा असर डालेंगी।
- किफायती घरों की बिक्री बढ़ेगी।
- लग्जरी घरों की बिक्री पीक पर।
- गोल्ड लोन शेयर चमके।
- 100000 के सोने पर 85000 का लोन मिलेगा।
- कंपनियों में तेजी।
- आरबीआई का फोकस जीडीपी बढ़ोतरी
- शेयर मार्केट के वह 5 सेक्टर जिन्हें सबसे ज्यादा लाभ होगा – – -रियल स्टेट – बैंकिंग – ऑटो सेक्टर -एफएमसी जी सेक्टर – -आईटी सेक्टर
- आगे क्या उम्मीद।
- क्या राय है एक्सपर्ट की।
- निष्कर्ष।
- संबंधित महत्वपूर्ण प्रश्न उत्तर
आरबीआई के गवर्नर ने सीआरआर मैं 100 आधार अंकों की कटौती की भी घोषणा की जो 6 सितंबर 4 अक्टूबर 1 नवंबर और 29 नवंबर से 25 आधार अंकों की चार बराबर किस्तों में प्रभावी होगी। जनसंख्यकि, डिजिटलीकारण और घरेलू मांग के दम पर भारतीय अर्थव्यवस्था निवेशकों के लिए अपार अवसर प्रदान कर रही है। रिजर्व बैंक की इस घोषणा का शेयर बाजार ने स्वागत किया है और सेंसेक्स में बड़ा उछाल देखा गया है। केंद्रीय बैंक के इस कदम से बैंकिंग सिस्टम में 2.5 लाख करोड रुपए आने की उम्मीद है। जिससे लिक्विडिटी बढ़ेगी और क्रेडिट फ्लो को सपोर्ट मिलेगा। काम नीति का डर से बैंक रेनू पर ब्याज दर में कमी आती है जिससे उपभोक्ताओं के साथ-साथ व्यवसायों के लिए भी उधार लेना आसान हो जाता है। जिसके परिणाम स्वरुप अर्थव्यवस्था में अधिक खपत एवं निवेश होता है और उच्च विकास सुनिश्चित होता है हालांकि कटौती का असर इस पर निर्भर करेगा कि बैंक किस हद तक ब्याज काम करता है।
विकास दर 6.5% रहने का अनुमान :
वित्त वर्ष 2026 के लिए जीडीपी विकास दर अनुमान को 6.5% पर स्थिर रखा गया है। केंद्रीय बैंक के मुताबिक जीडीपी विकास दर वित्त वर्ष 2026 की पहली तिमाही में 6 पॉइंट 5% दूसरी तिमाही में 6.7 प्रतिशत तीसरी तिमाही में 6. 6% और चौथी तिमाही में 6.3% रह सकती है। आरबीआई के गवर्नर ने कहा कि इस साल फरवरी से अब तक रायपुर दर में लगातार 100 आधार अंकों की कटौती की गई है और इसलिए मौद्रिक नीति रुक को “अकोमोडेटिव” से बदलकर “न्यूट्रल” कर दिया गया है। इससे आरबीआई समग्र विकास मुद्रा स्पीति गतिशीलता पर कड़ी नजर रख सकेगा। कीमतों में हुई व्यापक आधार पर नरमी के बीच मुद्रा स्थिति दर अब घटकर 3.2 प्रतिशत रह गई है। इसके साथ ही आरबीआई ने मुद्रा स्थिति डर के अपने अनुमान को भी 4% से घटकर 3.7% कर दिया है. वित्त वर्ष 2026 के लिए जीडीपी विकास दर इस अवसर पर 6.5%. पर स्थिर रखा गया है।
ब्याज दरों में डबल कटौती :
आरबीआई एमपीसी ने शुक्रवार को जहां रेपो रेट में उम्मीद से भी अधिक 0.5% की कटौतिकर इसे 6% से घटकर 5.5% कर दिया। आरबीआई ने मार्केट को सरप्राइज देते हुए क्रेडिट रिजर्व रेशों (CRR) वह भी 4% से घटकर 3% कर दिया। इससे बैंक सहित ब्याज दरों के प्रति संवेदनशील सभी स्टॉक में जबरदस्त तेजी देखने को मिली।
सेंसेक्स 747 अंक उछला :
आरबीआई द्वारा की गई इन बाहरी रेट कट से होम लोन डिमांड बढ़ने के साथ मकान की बिक्री बढ़ सकती है इससे बैंकिंग फाइनेंस कंपनियां के साथ रियल्टी स्टॉक 4% से अधिक उछाल गए वहीं लोन सस्ता होने से कर बाइक की बिक्री भी बढ़ाने की उम्मीद है। इससे ऑटो शेयर को भी बूस्ट मिलने की संभावना है।
ब्याज दरों में हुई इस डबल कटौती से निफ़्टी बैंक इंडेक्स अपने नए ऑल टाइम हाई ₹5695 के स्तर पहुंचने के बाद 1.47 प्रतिशत 56578 के स्तर पर बंद हुआ।
यह चार बातें आपकी जेब पर सीधा असर डालेंगी :
1. सीआरआर में 1% की कटौती यानी बैंक और छूट दे सकते हैं —
आरबीआई ने नगद आरक्षित अनुपात सीआरआर को 4% से घटकर 3% कर दिया है इससे बैंकों के पास 2.5 लाख करोड़ की अतिरिक्त नगदी एकत्रित होगी यह बैंक को होम लोन की ब्याज दरों को कम करने का विकल्प देता है।
2. रिटेल महंगाई आरबीआई के टायर से नीचे बनी रहेगी :
महंगाई आरबीआई के दायरे से नीचे आ चुकी है वित्त वर्ष 2025 26 के लिए रिटेल महंगाई 3.7% रहने का अनुमान है जो पहले 4% थी यह राहत खाद्य वस्तुओं की कीमतों में नमी अंतर्राष्ट्रीय कमोडिटी प्राइस में गिरावट की वजह से आई है।
3. न्यूट्रल यानी रेट कट का चक्र थम सकता है :
आरबीआई ने अब नीति रोक अकोमोडेशन से बदलकर न्यूट्रल कर दिया है केंद्रीय बैंक के मुताबिक अब नीति के पास सीमित स्पेस है इसलिए हर कदम सोच समझ कर उठना होगा यानी रेपो रेट में कटौती का चक्र तेजी से समाप्त होने वाला है।
4. वैश्विक स्थिरता के बीच हमारी बैलेंस शीट बेहद मजबूत :
दुनिया में पूंजी फ्लोर को लेकर उतार चढ़ाव हैं लेकिन भारत में उजली तस्वीर है। इसकी वजह है संतुलंत बैलेंस शीट कॉर्पोरेट घरेलू बैंक सरकार और विदेशी क्षेत्र इन सभी मोचन पर स्थिरता बनी हुई है और निवेश के लिए एक नया माहौल तैयार हो रहा है।
किफायती घरों की बिक्री तेजी से बढ़ेगी :
रिजर्व बैंक ने रेपो रेट में एक मस्त जीरो पॉइंट पांच प्रतिशत की कटौती कर इंडस्ट्री से लेकर आम कर्ज दाताओं को चौंका दिया है। रियल्टी और ऑटो सेक्टर को इसका सबसे ज्यादा फायदा मिल सकता है खास तौर पर के फायदे और मिड रेंज वाले घरों और कारों की बिक्री को ट्रिगर मिल सकता है। कोविद-19 के बाद से देश भर में महानगरों से लेकर टियर 2 शहरों में अफॉर्डेबल मकान की बिक्री में सुस्ती देखी गई है। अनार के आंकड़ों से पता चलता है कि बड़े शहरों में के फायदे आवास की बिक्री का हिस्सा 2019 में 38% से गिरकर 2024 में 18% ही रह गया था। इस दौरान सप्लाई में भी हिस्सेदारी 40% से घटकर 16% रह गई। हालांकि बिना बिके स्टॉक में 19% की गिरावट देखी गई जो अफॉर्डेबल घरों की बिक्री की मांग का संकेत है।
रेपो रेट में यह है 0.5% की कटौती ऐसे वक्त हुई है जब 40 लाख से कम कीमत वाले घरों की बिक्री में मांग दिख रही है। बीते 1 साल में 7 बड़े शहरों में इस सेगमेंट में इन्वेंटरी 19% कम हुई है जो 2024 की पहली तिमाही में 1.40 लाख से घटकर 2025 की पहली तिमाही में 1 पॉइंट 13 लख यूनिट्स ही रह गई थी।
लग्जरी घरों की बिक्री पीक पर पहुंची :
कुल बिक्री में लग्जरी घरों का हिस्सा 2019 में 7% था जो 2024 में बढ़कर 26% हो गया। नई सप्लाई में हिस्सा 11% से दुगना होकर 26% हो गया लग्जरी घरों ( 1.5 करोड़ से अधिक) मैं बिना विकी स्टॉक में 24% की बढ़ोतरी हुई है यह 2024 की पहली तिमाही में 91,125 से बढ़कर 2025 की समान अवधि में 1.13 लाख हो गई।
गोल्ड लोन शेयर चमके :
इन घोषणाओं के साथ ही आरबीआई ने 2.5 लख रुपए से कम को गोल्ड लोन पर लोन टू वैल्यू एलटीवी रेशों को 75% से बढ़कर 85 कर दिया है इससे लोगों को अब गोल्ड की कुल कीमत के 85% के बराबर लोन मिलेगा इस फैसले से गोल्ड लोन कंपनियों के शेयर में पांच से 7% तक की बढ़ोतरी हुई है। रेट कट से बूस्ट के कारण शुक्रवार को सेंसेक्स 747 अंक यानी 0.92 प्रतिशत चढ़कर 82189 पर बंद हुआ निफ्टी भी 252 अंक यानी 1.0 2% से चढ़कर 25,0003 पर बंद हुआ।
एक लाख के सोने पर 85000 का लोन मिलेगा :
केंद्रीय बैंक ने गोल्ड लोन के नियमों में भी बदलाव किया है अब 2.5 लख रुपए तक के गोल्ड लोन पर लोन टू वैल्यू रेशों 75 प्रतिशत से बढ़कर 85% कर दिया है। अर्थात इसका मतलब होता है कि अब ₹100000 की गोल्ड वैल्यू पर 85000 तक का लोन मिल सकेगा पहले यह सीमा 75000 थी। 2.5 लख रुपए तक के छोटे गोल्ड लोन पर क्रेडिट अप्रेजल की जरूरत नहीं होगी यानी कागजी कार्रवाई कम होगी और लोन जल्दी मिलेगा। इससे छोटे कर्जदार खासकर ग्रामीण और छोटे शहर वाले इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए लोन लेना आसान हो जाएगा
कम्पनी तेजी
1. मुथूट फाइनेंस – 6.98%
2. मण्णपुरम फाइनेंस – 5.64%
3. आईआईएफएल फाई – 5.20%
4. चोलामंडलम फाइनेंस – 5.25%
आरबीआई का फोकस जीडीपी बढ़ोतरी पर :
रेपो रेट में इस साल एक प्रतिशत तक कटौती कर इसे 5 पॉइंट 5% पर लाने के बाद आरबीआई ने अपने नीतिगत रुख को एक अकमोडेटीव से न्यूट्रल यानी तटस्थ कर दिया है। केंद्रीय बैंक का मानना है कि अब नीतिगत धर्म को लेकर सीमित स्पेस बचा है इसलिए हर कदम सोच समझकर उठाना होगा। इससे भविष्य में दरों में कटौती की गुंजाइश सीमित हो गई है अब नीतिगत फैसले डाटा पर आधारित होंगे अब दरें तभी घटेगा जब महंगाई बढ़ने की दर काफी कम रह जाएगी। विशेषज्ञों का कहना है कि आरबीआई के फैसलों से ग्रामीण और शहरी इलाकों में खपत बढ़ने की उम्मीद है। इन्वेस्टमेंट फॉर्म फाइबर सिरका के फाउंडर अभय अग्रवाल ने कुछ समाचार पत्रों से खास बातचीत में बताया कि दरों में कटौती से खपत बढ़ेगी खपत बढ़ने से प्राइवेट कैंपेक्स बढ़ेगा कैंपेक्स बढ़ेगा तो रोजगार बढ़ेगा।
क्या कहना है एक्सपर्ट का :
1. वी.के. विजय कुमार, नियोजित फाइनेंस।
आरबीआई के फैसले इकोनामिक ग्रोथ को बढ़ावा देने वाले हैं पर रेट कट से बैंकों का मार्जिन कम होने की आशंका है इससे बैंक फाइनेंशियल स्टॉक दबाव में आ सकते हैं हालांकि ओवरऑल शेयर बाजार को आरबीआई के इस कदम से बूस्ट मिल सकता है।
2. डी. के. जोशी, मुख्य अर्थशास्त्री।
शेयर बाजार में सिर्फ रेपो रेट में कटौती से खास फायदा नहीं दिखता लेकिन सीआरआर में कटौती करते हुए आरबीआई ने लिक्विडिटी पुश किया है इन दोनों से इकोनॉमी को बहुत फायदा मिलेगा शहरी क्षेत्र में खपत बढ़ सकती है जिससे कंजमप्शन शेयरों में तेजी की उम्मीद है।
3. साक्षी गुप्ता, प्रिंसिपल इकोनॉमिस्ट एचडीएफसी बैंक
आरबीआई अब निकट भविष्य के लिए विराम ले सकता है सेंट्रल बैंक द्वारा डाटा निर्भर पर टर्न लेने की संभावना है और भविष्य में कोई भी डर कटौती केवल तभी हो सकती है जब विकास में भौतिक रूप से गिरावट आए।
महत्वपूर्ण प्रश्न उत्तर ( Q & A )
Question 1. रेपो रेट क्या होती है..?
उत्तर -पुनर्खरीद दर (पुनर्खरीद दर) वह ब्याज दर है जिस पर केंद्रीय बैंक वाणिज्यिक संस्थानों को धन उधार देता है जब धन की कमी होती है। सरल शब्दों में, यह वह दर है जिस पर बैंक कंसल्टेंसी के लिए सेंट्रल बैंक से धन उधार लिया जाता है, आमतौर पर सरकारी प्रतिभूतियों के बदले। यह तंत्र केंद्र को तरलता को विसर्जित करने और स्थिरता बनाए रखने की अनुमति देता है।
- उधार लेने की प्रणाली: जब वाणिज्यिक बैंकों की कमी का सामना करना पड़ता है, तो वे पैसे उधार लेने के लिए केंद्रीय बैंक से संपर्क कर सकते हैं। बदले में, सेंट्रल ईस्ट बैंक स्थापित रेपो दर पर ये धन उपलब्ध कराता है।
- संपार्श्विक के रूप में सरकारी स्वामित्व: ऋण लेने वाले बैंकों को संपार्श्विक के रूप में सरकारी स्वामित्व प्रदान करना चाहिए। ये प्रतिभूतियाँ केंद्रीय बैंक के लिए सुरक्षा जाल के रूप में कार्य करती हैं, यह सुनिश्चित करती हैं कि ऋण सुरक्षित है और भुगतान किया जाएगा।
- पुनर्खरीद समझौता: “रेपो” शब्द पुनर्खरीद अभिनेता का रूप है। इस समझौते में यह निर्धारित किया गया है कि ऋण लेने वाले भविष्य के बैंक की किसी भी तारीख पर प्रतिभूतियों को पुनर्खरीद करना, आमतौर पर उच्च मूल्य पर, जिसमें रिपो दर पर गणना की गई ब्याज भी शामिल है।
Question 2. रेपो दर कैसे काम करती है.?
यह सुझाव देने के लिए कि रेपो दर कैसे संचालित होती है, इसकी तकनीक और इन टेक्नोलॉजी को शामिल करने की प्रक्रिया का पता लगाना आवश्यक है:
- उधार लेने की शुरुआत: जब किसी वाणिज्यिक बैंक को धन की आवश्यकता होती है, तो वह केंद्रीय बैंक से संपर्क करता है, अपनी आवश्यकताएं और संपार्श्विक के रूप में सरकारी प्रतिभूतियां प्रदान करता है।
- बैंक की भूमिका: केंद्रीय बैंक बैंक का आकलन करता है, संपार्श्विक को मंजूरी देता है, और असाधारण केंद्रीय रिज़र्व दर पर उपलब्ध कराता है।
- ब्याज गणना: ब्याज दर (रेपो दर) ऋण ली गई राशि पर लागू होती है, और यह वाणिज्यिक बैंक के लिए ब्याज दर के रूप में अनिवार्य रूप से ऋण लेने की लागत है।
- प्रतिभूतियों की पुनर्खरीद: स्वीकृत अवधि के बाद, ऋण लेने वाला बैंक सेंट्रल बैंक से प्रतिभूतियों को उस मूल्य पर पुनर्खरीद करता है जिसमें ऋण ली गई राशि और ब्याज शामिल होता है।
Question 3. रेपो दर का क्या महत्व है..?
रेपो दर इकोनोमिक जर्नल में काफी महत्वपूर्ण रचना है। यह एक ऐसा उपकरण है जिसका उपयोग केंद्रीय बैंक कई व्यापक आर्थिक बैंकों को प्राप्त करने के लिए करता है:
तरलता प्रबंधन: तरलता प्रबंधन प्रणाली में तरलता के प्रबंधन में भी महत्वपूर्ण है। इस दर को समाप्त करके, केंद्रीय बैंक बैंकों द्वारा उधार ली जाने वाली सलाहकार को नियंत्रित किया जा सकता है,
निजीकरण नियंत्रण: स्वामित्व अधिकार का एक प्राथमिक उपयोग स्वामित्व है। जब बांड्ज़ अधिक होता है, तो सेंट्रल बैंक रेपो दर बढ़ाया जा सकता है। इससे ऋण लेना अधिक महंगा हो जाता है, जिससे उद्योग में मुद्रा आपूर्ति कम हो जाती है, जिससे प्रतिभूतियों को कम करने में मदद मिल सकती है।
आर्थिक प्रोत्साहन: इसके विपरीत, कम आर्थिक विकास की अवधि के दौरान, केंद्रीय बैंक राजकोषीय दर को कम कर सकता है। इससे ऋण लेना सस्ता हो जाता है, जिससे व्यवसाय और उपभोक्ताओं को ऋण मुक्ति के लिए छूट मिल जाती है, जिससे आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलता है।
Question 4. क्रेडिट रिजर्व रेशों (CRR ) क्या होता है..?
उत्तर – नकद आरक्षित अनुपात (सीआरआर) के तहत, वाणिज्यिक बैंकों को केंद्रीय बैंक के पास रिजर्व के रूप में एक निश्चित न्यूनतम राशि जमा करनी होती है। बैंक की कुल जमाराशि के मुकाबले रिजर्व में रखी जाने वाली नकदी का प्रतिशत, नकद आरक्षित अनुपात कहलाता है। नकद आरक्षित राशि या तो बैंक की तिजोरी में जमा होती है या आरबीआई को भेजी जाती है।
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