"लहरों से डरकर नौका पार नहीं होती".. सबसे बड़ी प्रेरणादायक कविता...भावार्थ सहित।l


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प्रेरणा डायरी

टुडावली, राजस्थान भारत, 321610



कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।
लहरों से डर कर नौका पार नहीं होती।।


दोस्तों नमस्कार,


आज मैं जिस महान प्रेरणादायक कविता की चर्चा करने वाला हूं वह राष्ट्रीय कवि सोनलाल दुवेदी द्वारा लिखित मानी जाती है। सूर्य के तेज कि भांति ऊर्जा देने वाली,और असीम प्रेरणा  के दर्शन आपको इस कविता में होंगें। आज के इस आर्टिकल कि खास बात यह है कि कविता के अंत में हम इस कविता के भावार्थ कोसमझेंगे विद्यार्थियों के नजरिए से इस कविता का प्रेरणादायक भावार्थ प्रस्तुत किया गया है। छात्रों के लिए इस कविता में क्या संदेश छुपा हुआ है..? इस बात को जानने-समझने का प्रयास किया गया है। छात्रों को यह कविता अवश्य पढ़नी चाहिए, क्योंकि यह जीवन के प्रति और अपने कर्म और लक्ष्य के प्रति एक नई सोच पैदा करके उन्हें हासिल करने में हमारी मदद करती है। मैंने इंटरनेट और वेबसाइटों पर इस कविता के बारे में रिसर्च किया है, तो एक बात सामने निकल कर आई है कि - यह कविता काफी वेबसाइटों पर लिखी हुई है लेकिन इसका भावार्थ स्पष्ट करने वाले आर्टिकल नहीं के बराबर है। इस कविता से हम तब ही अच्छी सीख प्राप्त कर सकते हैं जब इस कविता के भावार्थ को भली भांति समझ पाएंगे। इस कविता में छुपे हुए संदेश को समझ पाएंगे। इस कविता को महानायक अमिताभ बच्चन ने भी अपने सवार दिए हैं, उनके द्वारा गाई गई यह कविता यूट्यूब पर काफी लोकप्रिय हुई।  जिन छात्रों को वीडियो माध्यम से यह कविता अच्छी लगती है वह महानायक अमिताभ बच्चन की आवाज में इस कविता को सुन सकते हैं। इसीलिए उसका वीडियो मैंने नीचे दिया है। लेकिन यूट्यूब की बात हो या वेबसाइटों कि, या फिर ब्लॉग आर्टिकलों की बात हो, इस कविता के भावार्थ को स्पष्ट करने वाले आर्टिकल बहुत कम है।  प्रेरणा डायरी ब्लॉग कि आज की इस आर्टिकल का मुख्य उद्देश्य इस कविता के भावार्थ को स्पष्ट करना और उसे छात्रों के सामने प्रस्तुत करना है, ताकि वह इस महान कविता से प्रेरणा ग्रहण करके प्रेरित हो सके। 




 
         वीडियो - "लहरों से डर कर नौका पार नहीं होती.."

         प्रेरणा डायरी ब्लॉग - "आपकी खुशहाली"




यह आर्टिकल अपने आप में इसीलिए यूनिक और बेहतरीन है क्योंकि इसमें इस कविता की पूरी व्याख्या की गई है। और एक छात्र के नज़रिये से इस कविता के भावार्थ, मैसेज, और संदेश को समझाया गया है। आज का यह लेख इस कविता में छुपी हुई प्रेरणा, भावार्थ, और संदेश को उजागर करता है। छात्रों और युवाओं को प्रेरणा देने वाली दृष्टि मैं इस कविता की एक नई व्याख्या आपके सामने पेश करूंगा। जो प्रेरणा दायक व्याख्या होगी। इससे पहले कि मैं आर्टिकल में आगे बढूं, मैं इस कविता से जुड़ा हुआ अपना एक अनुभव शेयर करना चाहता हूं... आप सबके साथ। और वो ये.. की एक लंबे समय तक में खुद अपनी जिंदगी में नाकामयाब रहा। कई भर्ती परीक्षाओं की तैयारी की पर सफलता नहीं मिली। लगभग 10 वर्षों तक में एक के बाद एक प्रयास करता रहा, लेकिन सफलता हासिल नहीं हुई। पड़ोसी और मेरे दोस्त मेरा मजाक बनाने लगे थे। पारिवारिक जिम्मेदारियां बढ़ती गई। नौकरी लगने का दबाव भी बढ़ गया. और आप भली भांति इस बात से परिचित हैं, कि दबाव और तनाव में काम बिगड़ाता ही है.. सुधरता नहीं। उसे समय मैंने यह भी नहीं सोचा था  कि नौकरी नहीं लगेगी.. तो मैं फिर क्या काम करूंगा..? काफी समय तक मैंने अपनी पत्नी से पैसे मांग कर अपना खर्चा चलाया है। एक समय ऐसा आया तब मैं बेहद निराश और हताश हो चुका था। मोटिवेशन की बातें भी बुरी लगती थी। हर तरफ अंधकार ही अंधकार नज़र आता था। एक बार ऐसे ही मैं घर पर लेटे-लेटे एक किताब से इस कविता को पढ़ रहा था। जैसे ही मैं कविता को पूरा पढ़ा, मेरे मन में एक ऊर्जा का अंकुरण हुआ। मेरे अंदर कुछ जोश और उत्साह पैदा हुआ। इसके पक्ष में लगातार कई दिनों तक इस कविता को दिन में एक दो बार पढ़ना था। और उसके बाद मैंने अपना लेखन कार्य और कुछ बिजनेस स्टार्ट किया। दोनों ही कार्यों में मुझे अच्छी  सफलता और कामयाबी प्राप्त हुई। आज भी मैं जब कभी डिमोटिवेट होता हूं, और उदास होता हूं, तब इस कविता को ध्यान पूर्वक पड़ता हूं। और कवि के प्रेरणादायक संदेश को ग्रहण करने का प्रयास करता हूं। ऐसा करने पर मुझे इस कविता से बड़ी ऊर्जा प्राप्त होती है और मैं फिर से आपको तारोंताज़ा महसूस कराता हूं। मुझे इतनी ऊर्जा किसी और चीज़ से नहीं मिल सकती,जो इस कविता से मिलती है। मैं अपनी सारी उदासी और दुखों को भूलकर फिर से सकारात्मक सोच के साथ अपने राइटिंग और बिजनेस के कार्य में जुट जाता हूं।




              प्रेरणा डायरी ब्लॉग - "छात्रों का हमसफ़र" 
    
    
जिस कविता के बारे मैं बात कर रहा हूँ, उसके लेखक को लेकर कई नाम जुड़े हुए हैं जैसे - हरिवंश राय बच्चन, सोहन लाल देवेदी आदि, इसके असली लेखक सोहनलाल लाल देवेदी जी को ही माना जाता है। आइए पहले आप इस संपूर्ण कविता को मेरे साथ पढ़ें। शान्त और एकाग्र चित्त होकर । क्योंकि प्रकृति की एक खासियत है, कि किसी काम को आप जितने मन और लगन से करते हैं, प्रकृति उसे चीज को आपको उतना ही जल्दी प्रदान करती है।


                        कविता 

1. कोशिश करने वालों की कभी  हार नहीं होती,
 लहरो से डरकर नाव पार नहीं होता।
 

2. नन्हीं चीटी जब दाना लेकर चलती है 
चढ़ती दीवारों पर, सौ बार फिसलती है।


3.  मन का विश्वास रंगो में साहस भरता है, 
क्रशर गिरना, थोक चढ़ना, ना अखरता है।


4. उसकी मेहनत की कमाई नहीं बनी 
कोशिश करने वालों की हार नहीं होती। 


5.  डुबकियाँ सिन्धु में स्थापित है
जाब्ता खाली हाथ लौटता है।
 

6. मिले न सहजाही मोती गहरे पानी में 
    सबसे बड़ा दुगना उत्साह एक ही इलाके में।


7.  मुठी हर बार खाली नहीं होती, 
कोशिश करने वालों को कभी हार नहीं मिलती।


8. चुनौती एक चुनौती है इसे स्वीकार करो 
 क्या कभी देखा, देखो और सुधार करो।


9.  जब तक न सफल हो नींद चैन तुम्हें 
संघर्ष का मैदान छोड़ो मत भागो तुम।


10.  कुछ फिल्में बिना ही जय जय कार के
कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।


कविता की व्याख्या :--




1.    कोशिश करने  वालों की कभी हार नहीं होती,
       तूफ़ानों से डर कर कश्ती पार नहीं होता।

(मैंने "लहरों" के स्थान पर "तूफ़ान" और "नौका" के स्थान पर "कश्ती" शब्द का प्रयोग किया है।)

 इस पंक्ति का भावार्थ है - असफलताओं से डरकर कभी भी अपनी कोशिश बंद नहीं करनी चाहिए। क्योंकि लगातार कोसिस करने वालो कि कभी हार नहीं होती अर्थात लगातार प्रयास करने वाले विजय श्री को प्राप्त करते है। यह पंक्ति हमें हर विपरीत परिस्थितियों को पीछे छोड़ते हुए भी आगे बढ़ती रहने की कोशिश करने का संदेश देती है। सबसे बड़ी ख़ास बात यह है कि इस कविता को हमारे रहस्यों की प्रेरणाएँ कहते हैं और यह संदेश  हम नाव  के माध्यम से और भी बेहतरीन तरीकों से समझ सकते हैं  । जैसे -   एक कस्ती कभी भी अपने जानी दुश्मन सागर की लहरों/तूफानों से नहीं डरती। क्योंकि नौका यह बात भली भाती जानती है कि अगर वह सागर में लहरों से डर जाएगी तो कभी भी उन्हें पार नहीं कर पाएगी। यानी अपने लक्ष्य और अपने और अपने जीवन के मकसद को हासिल नहीं कर सकते। और अगर वह लहरों से डरता है, तो शायद कभी भी समुद्र को पार नहीं कर पाता। इस छोटी सी लाइन में यही संदेश छिपा हुआ है कि हमें इन नावों की तरह अपने जीवन की परेशानियों को पार करके अपना लक्ष्य प्राप्त करना है।

2. नन्ही चींटी जब दाना लेकर चलती है,
   चलती है, दीवारों पर सौ बार फिसलती है।

 दोस्तों, नन्ही चींटी के माध्यम से कविता कि ये पंक्तिया संदेश देती है- "विफलता के भय से भयभीत हुए बिना हमहे अपने कामयाबी हासिल करने के प्रयास अनवरत जारी रखने चाइये। और ये सींख एक चींटी से अच्छी भला कौन दे सकता है।  कि एक छोटा सा जीव चींटी भोजन संयोजन समय दीवारों पर चढ़ता है और बार-बार असफल हो जाता है लेकिन वह फिर से गिर जाता है लेकिन वह फिर से गिर जाता है वह फिर से गिर जाता है इस तरह बार-बार प्रयास करता है कि वह अपने लक्ष्य और अपनी मंजिल को प्राप्त कर सके। यह लाइन हमें यह संदेश भेजती है कि हमें भी बार-बार मिलने वाली चुनौतियों और चुनौतियों से ना घबराते हुए, अपना प्रयास जारी रखना चाहिए।

3. मन का विश्वास रगों में साहस भरता है
 गिर कर चढ़ना, चढ़ कर फिरना ना आखरता है।

 दोस्तों अपने खाने में एक-एक बातें करने में बार-बार चिंटी का गिरना, उठना, फिर गिरना, फिर उठना, उसे गिरना और कठिनाई नहीं बल्कि उसके खून में नया साहस और उसके रगों में जोश भर रहा है। बार-बार डेल में भी उसे आनंद की अनुभूति हो रही है। कुछ लाइन याद आ रही है -

"तेरे डेल में भी तेरा हार नहीं
 क तू आदमी है, अवतार नहीं।

 यहां डेल का भावार्थ है डेल हो जाना। चींटी दीवारों पर चढ़ाई करते समय बार-बार मुलाकात हो रही थी लेकिन वह लगातार अपना प्रयास जारी रखती रही, अंत में अपनी मंजिल को प्राप्त कर लिया। छात्रों और युवाओं को इस लाइन पर यह संदेश दिया जाता है कि हमें असफलताओं से डरना नहीं चाहिए। 


4. अंतिम उसकी कोशिश बेकार नहीं हुई
      कोशिश करने वालों की कभी हार होती है

 दोस्तों, कश्ती तूफानों से, और नन्हीं चिंटी दीवारों से साहसी बार-बार अपनी मंजिल को पाने का प्रयास करते हैं। अंत में इस कार्य में सफल हो जाते हैं। क्योंकि प्रकृति का नियम है कि सात्विक मन से प्रयास करने वालों को कभी पराजय का सामना नहीं करना पड़ता। मन लगन से प्रयास करने वाले से कभी निराशा नहीं होती। और कोशिश करने वालों को कभी-कभी हार का सामना नहीं करना पड़ता। एक छात्र को अपने जीवन में अच्छी कार्यक्षमता हासिल करने के लिए मेहनत और मेहनत के लिए तत्पर रहना चाहिए। हमारे युवा विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करने के लिए प्रेरणा लेना आवश्यक है।

5. डुबकियाँ सिन्धु में स्थापित है
     जा जा कर खाली हाथ लौट आता है।

 दोस्तों, सिंधु नदी में मोती मूर्ति वाले को शायद आपने ना देखा हो, पर मुझे एक दो बार ये करतब देखने का मौका मिला था। हालाँकि आजकल ना तो समान रूप से बचे हुए हैं, और ना ही अब सिंधु नदी में मोती शेष हैं। पुराने समय में इंजीनियर अपनी और अपने परिवार की समान से शुरुआत करते थे। दोस्तों यह काम बड़ा मुश्किल है। सिंधु नदी से मोती मूर्ति कोई सरल कार्य नहीं है। असंतुलित और कई बार तो कई दिन तक सिंधु नदी के किनारे पानी में गोटे बने रहते हैं, उनके हाथ पर एक भी मोती का हाथ नहीं लगता। लेकिन इसी आशा और उम्मीद के साथ वह लगातार अपनी कोशिश जारी रखती है कि उसके भी बच्चे में कभी ना कभी मोती जरूर आएगा। अर्थात उसे अपने कार्य में सफलता अवश्य मिलेगी। इसी तरह उम्मीद है कि वह निरंतर और निरंतर प्रयास करते रहेंगे। और सफलता मिलती है।

6. मिलेट नहीं सहजाही मोती गहना पानी में
   सबसे बड़ा डुंगना उत्साह

 सिंधु नदी के गहरे पानी से मोती उद्घाटित करना आसान काम नहीं। उस गहरे पानी में मोती की प्राप्ति कोई सहज कार्य नहीं है। लेकिन हतोत्साहित होने की अनंत अनंत का उत्साह दुगना हो रहा है। मैं बार-बार मोती हासिल करने की कोशिश करता हूं और गहराई में पानी ढूंढता हूं। और बार-बार उसका हौसला दुगना हो रहा है, उम्मीद है कि इस बार उसका प्रयास निश्चित रूप से सफल होगा। 

7. मुठी हर बार खाली नहीं होती
    कोशिश करनेवालों की हार नहीं होती

 अमेरीका की यह कोशिश बेकार नहीं थी, और डॉग क्लिंज ने उसे ऐसा महसूस कराया कि उसके अमेरीका में इस बार पर्ल आ गया है यानी उसने अपने काम में सफलता हासिल कर ली। उनका प्रयास सफल रहा और सरकार बनी। गोटाखोर की लगन, मेहनत और बार-बार की जा रही कोशिश ने मोती हासिल कर सफलता हासिल की। 

8. चुनौती एक चुनौती है, इसे स्वीकार करो
 क्या कमी रह गयी देखो, और सुधार करो।

 दोस्तों अगर हमें हमारी गाड़ी में बार-बार, सफलता का दृश्य देखने को मिल रहा है तो हमें एक बार मुंह करके शांत मन से अपने प्रिय को कम आंकना चाहिए। असफलता से डरने की स्थिति में उन्हें नारियल के रूप में स्वीकार करना चाहिए। बार-बार मिलने वाली असफलताओं के पीछे हमें कोई ना कोई कमी जरूर रखनी चाहिए, हमें अपनी उन कमियों को ढूंढ़कर उन्हें तुरंत सुधारना चाहिए।

9. जब तक न सफल हो नींद, त्यागो तुम
 संघर्षों का मैदान मत छोड़ो तुम।

 दोस्तों यह कविता हमें यह संदेश सेवा है। जब तक हमें सफलता प्राप्त न हो जाए हमें कठिन परिश्रम, मेहनत और मौज-मस्ती के साथ अपनी प्रिय जान रखनी चाहिए। इसके लिए अनिद्रा की चेन ही क्यों नया त्याग ना पड़े। कहते हैं "नसीब उनके जागते हैं रातों को जगाते हैं, सोने वाले बस सोती ही रह जाते हैं। सफलता के संघर्षों से प्राप्त होती है। संघर्षों की कहानी में सफलता मिलती है। जो लोग संघर्षों के मैदान से भाग जाते हैं, उन्हें कर की डिग्री से विभूषित किया जाता है। बिना किसी असफलता के सफलता के साथ नायाब चीजें मिलती हैं।"

10. कुछ बिना ही जय जय कार नहीं होती, कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

 दोस्तों दुनिया उन्हें की जय जयकार करती है, जो अच्छा मुकाम हासिल कर लेते हैं। आप ही बताइए जब तक आप कोई उपलब्धि अर्जित नहीं करेंगे कोई आपकी जय जयकार करेगा। आपकी तारीफ करेगा..? जब तक आप किला फतह नहीं कर लेते अर्थात विजय प्राप्त नहीं कर लेते, तब तक कोई आपकी जय बोलने वाला नहीं है। बार-बार सफलता अर्जित करने की हमारी कोशिश है कभी बंद नहीं होने चाहिए क्योंकि कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती है और अंत में। चाहे कितनी भी मुसीबतें और बात है कितनी भी असफलताएं प्राप्त हो लेकिन अंत में कोशिश करने वालों की ही जय जयकार होती है


 महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर -

Question 1. "लहरों से डरकर नौका पार नहीं होती।" कविता को किसने लिखा है.? इसके लेखक की जानकारी दीजिए..?

उत्तर - "लहरों से डरकर नौका पार नहीं होती' कविता, राष्ट्रकवि सोहन लाल द्विवेदी ने लिखी थी. यह कविता हिन्दी दिवस पर लिखी गई थी। यह एक प्रेरणादाई तथा मां और मस्तिष्क में उर्जा उत्पन्न करने वाली कविता है।

सोहन लाल द्विवेदी के बारे में ज़्यादा जानकारीः

1. सोहन लाल द्विवेदी का जन्म साल 1906 में उत्तर प्रदेश के फ़तेहपुर ज़िले के बिंदकी में हुआ था.

2.वे महात्मा गांधी के दर्शन से बहुत प्रभावित थे.

3. उन्होंने राष्ट्रीयता, चेतना, और ऊर्जा से भरी कई कविताएं लिखीं.

4. उन्होंने बालोपयोगी रचनाएं भी लिखीं.
उनकी प्रमुख रचनाएं हैं - भैरवी, पूजागीत सेवाग्राम, युगाधार, कुणाल, चेतना, बांसुरी, दूधबतासा.

5. साल 1969 में उन्हें पद्मश्री सम्मान से सम्मानित किया गया था.

Question 2.   "लहरों से डर कर नौका पार नहीं होती" कविता छात्रों/लोंगो को क्या संदेश देती है.?.

 उत्तर - सोहन लाल द्विवेदी की यह कविता निरंतर प्रयास करने और हार न मानने का संदेश देती है। कवि कहते हैं कि यदि कोई व्यक्ति निरंतर प्रयास करता रहे और हार नहीं मानता, तो उसे सफलता अवश्य प्राप्त होती है। कविता के माध्यम से कवि कहते हैं कि जीवन में कई चुनौतियाँ और बाधाएँ आती हैं, लेकिन उनसे डरना नहीं चाहिए। जैसे - नौका,चींटी,और गोताखोर के सामने लाख चुनौतियां आती हैं, पर वह अपने लक्ष्य से विचलित नहीं होते और अंत में सफलता का स्वाद चखते हैं। 

Question 3. "लहरों से डर कर" कविता कैसी है..?
उत्तर - लहरों से डर कर कविता अच्छी और प्रेरणादाई कविता है। अच्छी कविता की पहचान उसकी भाषा शैली,  तथा गुण धर्मो से होती है। अगर गुना के आधार पर बात की जाए तो यह कविता सारस और ओजस्वी कविता की श्रेणी में आती है। इसकी भाषा शैली सरल एवं सलेश है तथा यह है एक बार पढ़ने में ही समझ में आ जाती है। शिल्प की दृष्टिकोण से भी यह कविता अच्छी कविता मानी गई है। जहां तक कविता में छपी संदेश की बात है तो इसमें भी यह कविता अव्वल स्थान पर है। क्योंकि यह कविता हमारे समाज और युवाओं को यह संदेश देती है कि हमें बढ़ाओ से एवं समस्याओं से घबराने के स्थान पर उनका डटकर मुकाबला करना चाहिए और चुनौतियों को भी अपने अनुकूल बना लेना चाहिए। यही जिंदगी की सफलता है. 
 

Question 4. " लहरों से डर कर नौका पार नहीं होती कविता का संक्षिप्त भावार्थ क्या है..?
उत्तर - लहरों से डर कर नौका पार नहीं होती कविता का भावार्थ है कि हमें विपरीत हालातो में भी सूझबूझ, धैर्य एवं साहस के साथ कार्य करना चाहिए। यह कविता हमें बताती है कि हमें सफलता नहीं मिलने तक बार-बार प्रयास करने चाहिए। एक व्यक्ति को कठिन परिश्रम से घबराना नहीं चाहिए। यह कविता हमें संदेश देती है कि " हमें अपनी असफलता और कमियों को स्वीकार करके, उन्हें दूर करके, निरंतर आगे बढ़ाने के प्रयास करने चाहिए।
जैसे - एक चींटी करती है।
जैसे - एक गौतखोर करता है।




ब्लॉग - प्रेरणा डायरी। 
वेबसाइट -- prernadayari.com
राइटर - केदार लाल 



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