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सफलतापूर्वक और सम्मानजनक जीवन जीने की कला क्या है..?

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प्रेरणा डायरी ब्लॉग  www.prernadayari.com हिंडौन, करौली, राजस्थान। Kedar Lal / सिंह साब  सफलतापूर्वक और सम्मानजनक जीवन जीने की कला क्या है..? ओह, यह सवाल तो दिल के बहुत करीब है… और यह किसी एक का नहीं बल्कि हममें से बहुतों का सवाल है..? मैं खुद भी कई कई बार इस सवाल का सामना करता हूं" कि आखिर सफलतापूर्वक और सम्मानजनक जीवन में कैसे जी सकता हूं..?  और इसका जवाब सिर्फ ज्ञान से नहीं, अनुभव हमें जीवन जीने की कला सिखाते है। सफलतापूर्वक और सम्मानजनक जीवन जीना केवल पैसे या पद से नहीं, बल्कि सोच, व्यवहार और चरित्र से तय होता है। एक व्यक्ति और खासकर छात्र के लिए यह जीवन-कला बहुत जरूरी है क्योंकि यही भविष्य की दिशा तय करती है। तो आइए बैठिए मेरे साथ.. With एक कप चाय, और इस ज़िंदगी की किताब के पन्ने पलटते हैं, क्योंकि आज हम बात करने जा रहे हैं उस " कला"  की जो इंसान को न केवल सफल बनाती है, बल्कि उसे समाज में सम्मान भी दिलवाती है…और वो भी पूरी गरिमा, आत्मगौरव और मुस्कान के साथ।   सफलता और सम्मान   – ये दो जुड़वां भाई हैं, पर दोनों की परवरिश ...

छात्र अपने मन और बुद्धि की कंट्रोलिंग और रूलिंग पावर को कैसे बढ़ाएं..?

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आज के जमाने में सबसे सरल कार्य है - दूसरों को सलाह देना। हम दिन भर बैठे-बैठे बातें बना देंगे, - कि देश को ऐसे चलना चाहिए। परिवार ऐसे चलता है.।  समाज मे ऐसा होना चाहिए.। घर गृहस्ती ऐसे चलनी चाहिए। सरकार को ऐसा नहीं, वैसा करना चाहिए था। पर सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या हम अपने घर के चार-पांच सदस्यों के बीच संतुलन और प्रेम बनाए रखने में कामयाब है। दूसरों मे कमिया गिना रहें है, पर क्या हम खुद अपनी जिम्मेदारी और काम को ठीक से निभा पा रहे हैं। जो हमारा स्वयं का कर्तव्य है उसे ढंग से कर पा रहे हैं..। जिस कार्य को हमने कभी किया ही नहीं, उसे पर दूसरों को सलाह-मशवारा अपने शब्दों की खपत है, और कुछ नहीं। अनुभव से निकली हुई बात में शक्ति होती है पर बिना अनुभव के सलाह देना केवल ऊर्जा और समय की बर्बादी है।  सच्ची शक्ति रनिंग पावर और कंट्रोलिंग पावर में है अर्थात स्वयं पर शासन करने की क्षमता। जब तक मां वाणी और कर्मेंद्रियों पर हमारा नियंत्रण नहीं होगा तब तक हम परिवार कार्य स्थल समाज और देश को सही दिशा नहीं दे सकते। मैं अपनी चर्चा को आगे बड़ो उससे पहले लिए मैं आपको बताता हूं की मां ...

क्या भारत फिर बन सकता है विश्व गुरु.?

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   प्रेरणा डायरी (ब्लॉग)    Prernadayari.com     टुडावली,करौली,राजस्थान- 321610 भारत।      By - Kedar Lal ( सिंह साब, लिग़री जी ) <script async src="https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-4543233482420494"crossorigin="anonymous"></script>                                 क्या भारत फिर बन सकता है विश्व गुरु..?  आज की पोस्ट में/ टेबल ऑफ़ कंटेंट 1. विषय प्रवेश। 2. विश्व गुरु बनने के लिए क्या जरूरी है.? 3. प्राचीन भारत की शिक्षा प्रणाली का दुनिया में परचम           लहराता था। 4. इंडियन एजुकेशन एवं सर्विस सेक्टर की दुनिया भर में धूम। 5. एजुकेशन वर्ल्ड रैंकिंग में भी भारत का धमाल। 6. ग्लोबल नॉलेज के हब के रूप में भारत की पहचान। 7. क्या फिर बन सकता है भारत विश्व गुरु..? 8. भारत एक उभरती आर्थिक शक्ति के रूप में। 9. दमदार सैन्य ताकत। 10. भारतीय सांस्कृतिक विरासत की दुनिया मे...