छात्र अपने मन और बुद्धि की कंट्रोलिंग और रूलिंग पावर को कैसे बढ़ाएं..?
आज के जमाने में सबसे सरल कार्य है - दूसरों को सलाह देना। हम दिन भर बैठे-बैठे बातें बना देंगे, - कि देश को ऐसे चलना चाहिए। परिवार ऐसे चलता है.। समाज मे ऐसा होना चाहिए.। घर गृहस्ती ऐसे चलनी चाहिए। सरकार को ऐसा नहीं, वैसा करना चाहिए था। पर सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या हम अपने घर के चार-पांच सदस्यों के बीच संतुलन और प्रेम बनाए रखने में कामयाब है। दूसरों मे कमिया गिना रहें है, पर क्या हम खुद अपनी जिम्मेदारी और काम को ठीक से निभा पा रहे हैं। जो हमारा स्वयं का कर्तव्य है उसे ढंग से कर पा रहे हैं..। जिस कार्य को हमने कभी किया ही नहीं, उसे पर दूसरों को सलाह-मशवारा अपने शब्दों की खपत है, और कुछ नहीं। अनुभव से निकली हुई बात में शक्ति होती है पर बिना अनुभव के सलाह देना केवल ऊर्जा और समय की बर्बादी है। सच्ची शक्ति रनिंग पावर और कंट्रोलिंग पावर में है अर्थात स्वयं पर शासन करने की क्षमता। जब तक मां वाणी और कर्मेंद्रियों पर हमारा नियंत्रण नहीं होगा तब तक हम परिवार कार्य स्थल समाज और देश को सही दिशा नहीं दे सकते। मैं अपनी चर्चा को आगे बड़ो उससे पहले लिए मैं आपको बताता हूं की मां ...