क्या सही है भारत में "एक देश एक चुनाव" प्रणाली..? ( प्रेरणा डायरी ब्लॉग "करंट फ्रंट" - देश दुनिया के ताजा मुद्दे "करंट - फ्रंट "जो विभिन्न परीक्षाओं में उपयोगी साबित होते हैं। तथा जिन मुद्दों पर साक्षात्कारों में प्रश्न पूछे जाते हैं )

प्रेरणा डायरी ब्लॉग, prernadiary.com
 टुडावली, टोडाभीम, राजस्थान - 32 1610, भारत।


 भारत दुनिया का एक ऐसा देश है जहां हर वर्ष चुनाव चलते रहते हैं, कभी केंद्र के चुनाव, कभी राज्य सरकारों के चुनाव, कभी स्थानीय स्वशासन और पंचायती राज्य के चुनाव। आप और हम सब देखते हैं कि भारत का कोई ना कोई हिस्सा हमेशा चुनाव कि माहौल में डूबा हुआ नजर आता है। इसका एक सबसे बड़ा नुकसान जो होता है वह यह है कि " हमारी सारी शासन व्यवस्था उस चुनाव प्रक्रिया मे जुट जाती है। और बाकी सभी महत्वपूर्ण कार्य गोंण हो जाती है। और भारत में कहीं ना कहीं किसी न किसी रूप में प्रतिवर्ष इलेक्शन का आयोजन होता रहता है। " एक देश एक चुनाव" के मुद्दे पर काफी पहले से चर्चाएं हो रही है पर मोदी सरकार इसे अमल में लाना चाहती है। इस मुद्दे पर सरकार ने कैबिनेट से भी मंजूरी ले ली है और इससे संबंधित बिल लोकसभा में आने वाला है। प्रेरणा डायरी ब्लॉग  काी सोच भी यही है कि देश में बार-बार होने वाले चुनाव के बजाय "एक देश एक चुनाव सिस्टम होना चाहिए"।   दोस्तों नई दुनिया के साथ दौड़ने के लिए पुराने सिस्टमों को बदलकर अपडेट करना किसी भी देश या व्यक्ति के लिए बेहद जरूरी होता है। हमारी चुनाव प्रणाली में अनेक सुधारो की गुंजाइश है। एक देश एक चुनाव मुद्दा इस समय काफी चर्चाओं में है और विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाएं जैसे IAS, RAS, UPSC, SSC तथा इन विभिन्न कंपटीशन एग्जाम में इससे संबंधित प्रश्न पूछे जाते हैं साथ ही साथ साक्षात्कारों में भी इस मुद्दे पर प्रतियोगी छात्रों से कई सवाल जवाब किए जाते हैं। आप अगर एक बार विषय को ध्यान पूर्वक विस्तार से पढ़ लेते हैं तो किसी सवाल के गलत होने की संभावना बहुत कम होती है। रीना डायरी के आज के आर्टिकल में एक देश एक चुनाव पर हम विस्तार से चर्चा करते हैं -

 क्या सही साबित होगी भारत में एक देश एक चुनाव प्रणाली..?

 एक देश एक चुनाव पर मोदी सरकार एक कदम और आगे बड़ी है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में गुरुवार को कैबिनेट बैठक में इससे जुड़े संविधान संशोधन बिल को हरी झंडी मिल गई है। कुछ जानकार सूत्रों के मुताबिक संसद के इसी शीतकालीन सत्र में इस बिल को पेश करने की तैयारी की जा रही है। इस बिल को सरकार सभी की सहमति से लागू करने के पक्ष में है इसीलिए सबसे पहले बिल को संयुक्त संसदीय कमेटी (जेपीसी)  को भेजा जा सकता है। यदि बिल दोनों सदनों से पास हो जाता है तो कानून बन जायेगा। मोदी सरकार 2029 से पहले एक देश एक चुनाव योजना को पूरी तरह धरातल पर उतरने की तैयारी में है। दोस्तों इस चुनावी प्रक्रिया में सुधार से पहले एक हाई पावर कमेटी रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता में बनी थी और इस कमेटी ने यह सुझाव दिया है कि पूरे देश में एक साथ चुनाव होना चाहिए।  एक देश एक चुनाव प्रणाली को सरकार पूरे देश में दो चरणों में लागू करने की तैयारी में है पहले चरण में लोकसभा और विधानसभा चुनाव को एक साथ करवाया जाएगा इसके 100 दिन के अंदर दूसरे चरण में नगर पालिकाओं और पंचायत के चुनाव करना प्रस्तावित है। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद न यह बात कही है कि पूरे देश को आम सहमति बनाकर इस प्रक्रिया को लागू करना चाहिए क्योंकि यह "देश से जुड़ा हुआ सवाल है किसी दल (पार्टी ) से नहीं।

 एक देश एक चुनाव पर "प्रेरणा डायरी ब्लॉग की राय

 प्रेरणा डेरी ब्लॉक छात्र और उनकी जिंदगी से जुड़ी एक मौलिक और यूनिक आर्टिकल ऑन की वेबसाइट है। प्रेरणा डायरी ब्लॉग इस बात को मानता है कि यदि किसी देश में लगातार, वर्ष भर, किसी न किसी संस्था, सरकार, लोकसभा विधानसभा तथा पंचायत के चुनाव चलती रहे तो उसे देश का काफी श्रम, धन, और संसाधन दुरुपयोग की भेंट चढ़ जाते हैं। आजकल के दौर में चुनाव प्रक्रिया और भी खर्चीली हो गई है। यदि कहीं भी चुनाव है तो पूरा प्रशासन तंत्र साल भर पहले ही इसकी तैयारी में जुट जाता है। सरकार को भी सभी कार्यों को छोड़कर चुनावी प्रक्रिया में संलग्न होना पड़ता है और यह प्रक्रिया वर्षों पहले शुरू हो जाती है। सरकार एवं प्रशासन का ध्यान चुनाव पर केंद्रित हो जाता है, इसमें गलती उनकी भी नहीं है क्योंकि चुनावी प्रक्रिया लोकतंत्र में सबसे जरूरी होती है। चुनाव के समय बाकी कार्य कौन हो जाते हैं और चुनावी प्रक्रिया को ही सर्वप्रथम लिया जाता है। बार-बार और लगातार चुनाव होते रहने से विकास कार्य ठप होते हैं। काफी समय से देश में एक देश एक चुनाव की मांग हो रही है। यदि ऐसा होता है तो यह समर्थन के काबिल बात है। प्रेरणा डेरी ब्लॉक के चीफ एडिटर के नाते में स्वम एक देश एक चुनाव बिल का समर्थन करता हूं।

 चुनाव एक साथ करने के लिए राज्यों की मंजूरी अनिवार्य नहीं -

 लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ करने के लिए राज्यों की मंजूरी अनिवार्य नहीं है। रामनाथ कोविंद कमेटी की रिपोर्ट में कहा गया है कि अनुच्छेद 83 (संसद के दोनों सदनों की अवधि) अनुच्छेद 172 ( राज्य विधान मंडलों की अवधि ) में संशोधन करते हुए अनुच्छेद 82 को अंतत स्थापित किए जाने के लिए संविधान संशोधन बिल लाया जाएगा।इसके लिए राज्यों के समर्थन की आवश्यकता नहीं है।

 विधानसभाओं का कार्यकाल..घटेगा का या बढ़ेगा..?

- राजस्थान मध्य प्रदेश छत्तीसगढ़ का कार्यकाल 2028 तक है इनके कार्यकाल को 2029 मैं होने वाले लोकसभा चुनाव तक बढ़ाया जा सकता है।

- उत्तर प्रदेश उत्तराखंड गुजरात पंजाब गोवा मणिपुर विधानसभाओं का कार्यकाल 2027 तक है यहां 2027 में चुनाव हुए तो अगला कार्यकाल 2029 तक स्वत समाप्त हो जाएगा।

- एक देश एक चुनाव की व्यवस्था लागू होने के बाद विधानसभाओं का कार्यकाल लोकसभा के पूर्ण कार्यकाल की समाप्ति पर ही खत्म होगा भले ही गठन किसी भी समय क्यों नहीं हुआ हो।



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